US और Iran: Qasem Soleimani के बाद क्या ईरान, अमरीका को हरा सकता है?

जब से अमेरिका के स्ट्राइक में ईरान के मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की मौत हुई है तब से दुनिया भर में सवाल उठ रहा है कि दोनों देशों के बीच चेतना के युद्ध की ओर जाएगा ईरान की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक देश के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्ला अली

हमे नहीं ने कहा कि सुलेमान की हत्या का कठोर बदला लिया जाए ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने भी कहा कि अमेरिका ने सुलेमान की हत्या कर एक बड़ी गलती कर दी है लेकिन ईरान की ओर से आ रहे रिडक्शन का जवाब अमृत राष् ट्रपति दोनों ट्रक ने यह कहते हुए दिया कि ईरान ने अगर अमरीका के किसी भी संपत्ति को छुआ तो अमरीका इसका बहुत कठोर जवाब देगा लेकिन जानकार मानते हैं कि ईरान इस वक्त अमरीका से ज़्यादा वाला है

सिचुएशन में है क्योंकि मिडल ईस्ट में चुनौतियां ज्यादा हैं और ईरान के अंदर भी लेकिन ईरान के सैन्य ताकत अपने पड़ोसियों से कहीं ज्यादा है तो ऐसे में ईरान क्या कर सकता है ये लगभग अकल्पनीय है कि ईरान इसके जवाब में कोई आक्रामक प्रतिक्रिया नहीं देगा लेकिन ये इतना सीधा सपाट नहीं होगा किराने एक हमले का जवाब दूसरे हमले से दे संभावना यह भी है कि इन सुलेमानी के बनाए गए और फंड किए गए गुणों से व्यापक समर्थन हासिल करने की कोशीश करें उदाहरण के लिए ईरान बंदा स्थित

अमरीकी दूतावास पर घेराबंदी को नया रूप दे सकता है वो इराकी सरकार को और भी मुश्किल स्थिती में डाल सकता है साथ ही इराक़ में अन्य जगहों पर प्रदर्शन को भड़का सकता है ताकि वो इनके पीछे दूसरे हमले कर सकें अमेरिका और उसके सहयोगी अपने पर ध्यान दे रहे हैं अमरीका के पहले ही बंगाल स्थित अपने दूतावास को सहायता भेजी है साथ ही जरूरत पड़ने पर वे क्षेत्रमें अपने सैन्य पेड़ों की संख्या को बढ़ा सकता है अगर ईरान बदले की बात कर रहा है

ईरान मिसाइल Iran misail

तो एक अहम सवाल यह है ईरान के सेना कितनी ताकतवर है ब्रिटेन के थिंक टैंक इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ के मुताबिक ईरान में लगभग पांच लाख तेईस हज़ार सैनिक हैं इसमें इरानी सेना के साढ़े तीन लाख और इस्लामिक रेवोल्यूशनरी  उठा कर सकती है इरानी सेना विदेशों में कैसे ऑपरेशन करती है ईरान की कुल फोर्स जिसका नेतृत्व जनरल सुलेमानी करते थे रेगुलेशन गार्ड के लिए विदेशों में खुशी ऑपरेशन करती है

और ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता कोर्स की बात करें तो ईरान इसमें कहीं ना कहीं सऊदी अरब और इस्राइल से कमजोर पड़ता है ऐसे में कमजोरी की भरपाई ईरान के मिसाइल करते हैं अमरीकी रक्षा विभाग का यह भी कहना है कि ईरान स्पेस टेक्नोलॉजी का परीक्षण कर रहा है कई बार ओके पाबंदी के बावजूद

ईरान अपने लिए ड्रोन विकसित करने में कामयाब रहा है ईरान इराक़ में इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ लड़ाई में साल दो हज़ार सोलह से ही अपने ड्रोन का इस्तेमाल करता है थिंक टैंक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान अपने सशस्त्र ड्रोन के साथ सीधे ताकि इसराइली एयरस्पेस में भी जा चुका है कि ईरान के पास साइबर सकते भी हैं

ईरान मिसाइल Iran misail
मिसाइल

साल दो हज़ार दस में ईरान के परमाणु संयंत्रों पर साइबर हमला हुआ था जिसके बाद दूसरे साइड क्षमता में बड़े सुधार के माना जाता है कि अब रेगुलेशन गार्ड के पास अलग साइबर कमांड है जो कमर्शियल और सैन्य जासूसी जैसे मामलों पर काम करता है दो हज़ार उन्नीस में अमेरिकी सेना की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि ईरान ने साइबर जासूसी के लिए

एस्पेस प्राकृतिक संसाधन टेलीकम्युनिकेशन उनकी और डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर्स को निशाना बनाया था दो हज़ार उन्नीस में ही माइक्रोसॉफ्ट ने कहा था कि ईरान और ईरान ने सरकार से ताल्लुक रखने वाले एक हैकर समूह ने अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव प्रचार अभियान और अमरीकी अधिकारियों अकाउंट में सेंध लगाने की कोशीश की थी