ब्रेकिंग! नागरिकता संशोधन कानून में होगा बदलाव उपराष्ट्रपति ने दिए संकेत ! मुस्लिम भी होंगे शामिल ?

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दोस्तों नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी को लेकर वे आज लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं जहाँ एक तरफ नागरिकता संशोधन कानून यानी की सिटीजन अमेंडमेंट एक्ट के अंदर मुस्लिम धर्म को छोड़कर सभी धर्मों लोगों को नागरिकता देने की बात कही गई

वहीं दूसरी तरफ जो लोग इस बिल का विरोध करते हैं यही कहना है कि इस बीच में आर्टिकल आर्टिकल फोर्टीन का उल्लंघन हो रहा है और धर्म के नाम पर डिस्क्रिमिनेशन किया जा रहा है लेकिन मैं आपको बता दूं तीसरा मामला अब आ चुका है वह एन पीआर का नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर लेकिन

मैं आपको बता दूं नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी और एनपीआर को लेकर के उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने बदलाव के संकेत दे दिया उन्होंने एक बहुत बड़ा बयान दिया है जो की नागरिकता संशोधन कानून और एनपीआर को लेकर के हैं क्या बयान दिया है

ये मैं आपको आगे बताएंगे लेकिन उससे पहले एक छोटी सी बी एस अगर आपको भी लगता है नागरिकता संशोधन कानून में सभी धर्मो के लोगों को जोड़ने की जरूरत है तो आप इस पोस्ट को लाइक कर दीजिए और सब्सक्राइब जरूर कर लीजिए

दूसरों को बृहस्पति बनकर या नाइडू ने जहाँ एक तरफ देश में नागरिकता संशोधन कानून का विरोध हो रहा है वहीं दूसरी तरफ एनर्जी लाने की बात कही जा रही है और एनपीआर दिलाने की बात कही जा रही लेकिन इस बीच उन्होंने बड़ा बयान दिया है

उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने जो संकेत दिए हैं उससे लगता है कि हँसी में बदलाव किया जा सकता है और बृहस्पति ने रविवार को कहा कि सिंह और इंडिया जैसे मुद्दों पर विचारपूर्ण और सकारात्मक बेहद जरूरी है मगर प्रदर्शन के दौरान हिंसा के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए उन्होंने कहा सीए हो या फिर एनपीआर देशवासियों को उनपर संवैधानिक संस्थाओं सभाओं और मीडिया में विचार गुणवत्ता तथा

सकारात्मक चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए मसलन यां कब आया क्यों आया और इसका क्या प्रभाव होगा और क्या इसमें किसी बदलाव की जरूरत है नायडू ने कहा कि चर्चा से ही हमारा तंत्र मजबूत होगा और लोगों में जानकारी बढ़ेगी संयुक्त आधार पर देश के दिवंगत सिंह एवं चलना बेटी के जयंती कार्यक्रम में उद्घाटन करते हुए कहा नायडू ने

कहा कि केंद्र को भी लोगों की अंतः आशंकाओं को दूर करना चाहिए जो प्रांत भी बल दिया उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सहमति असहमति आवाज़ आधारभूत सिद्धान्त है कोई चीज़ हमे पसंद हो या नहीं लेकिन दोनों पक्षों को सुना जाना चाहिए यानी की उन्होंने साफ साफ कहा है कि जिन चीज़ को लेकर के लोग आज विरोध कर रहे जिन चीजों को लेकर लोगों में कहीं न कहीं आशंका है उससे सरकार को विचार

जरूर करना चाहिए और अगर उनके ख़िलाफ़ अगर ऐसा लगता है चीज़ें हैं तो उनसे सरकार अपने स्थिती स्पष्ट जरूर करे तो ऐसे में लगरहा है कहीं न कहीं उपराष्ट्रपति को भी लगता है कि इस कानून में कहीं न कहीं बदलाव होने चाहिए अब देखना ये होगा कि क्या इस कानून में बदलाव होता है सरकार इसके संख्या लेती है ये तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन आपके हिसाब से क्या होना चाहिए अपनी प्रतिभा को मतलब उसमें जरूर दीजिए और इस वीडियो को लाइक क्रिस्टल के जान को सबसे करें

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